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खुद को परखो खुद को जानो,अपने अंदर की संभावनायें जगाओ। चुभ रही है जो हृदय में ,उस चुभन को पुष्प बनाओ। परखो अपने अंदर की सच्चाई को, अच्छाई को ढाल बना लो। जीतोगे हर जंग मुसाफिर,जीतने की उम्मीद जगा लो। प्रकृति भी तुम्हें तोड न पायेगी ,बस आत्मविश्लेषण कर मनको उठा लो। खुद को परखो खुद को जानो,खुद की एक पहचान बना लो। सविता

खुद को परखो खुद को जानो,अपने अंदर की संभावनायें जगाओ। चुभ रही है जो हृदय में ,उस चुभन को पुष्प बनाओ। परखो अपने अंदर की सच्चाई को, अच्छाई को ढाल बना लो। जीतोगे हर जंग मुसाफिर,जीतने की उम्मीद जगा लो। प्रकृति भी तुम्हें तोड न पायेगी ,बस आत्मविश्लेषण कर मनको उठा लो। खुद को परखो खुद को जानो,खुद की एक पहचान बना लो। सविता

खुद को परखो खुद को जानो,अपने अंदर की संभावनायें जगाओ।चुभ रही है जो हृदय में ,उस चुभन को पुष्प बनाओ।परखो अपने अंदर की सच्चाई को, अच्छाई को ढाल बना लो।जीतोगे हर जंग मुसाफिर,जीतने की उम्मीद जगा लो।प्रकृति भी तुम्हें तोड न पायेगी ,बस आत्मविश्लेषण कर मनको उठा लो।खुद को परखो खुद को जानो,खुद की एक
सोचा तो है नये साल में, कुछ ऐसा कर जायें हम। मन में आये विचारों को,पूरा कर दिखलायें हम। छोड देवें आलस्य प्रमाद को,अपनायें अच्छी आदतें। खुद बदलेंगे नये साल में, दिल में सहेजें जज्बातें। पिछली गलतियों को नदोहराकर ,प्रगति पथ पर बढना है । असफलताओं से सीख लेकर,चुनौतियां स्वीकार करना है । सविता

सोचा तो है नये साल में, कुछ ऐसा कर जायें हम। मन में आये विचारों को,पूरा कर दिखलायें हम। छोड देवें आलस्य प्रमाद को,अपनायें अच्छी आदतें। खुद बदलेंगे नये साल में, दिल में सहेजें जज्बातें। पिछली गलतियों को नदोहराकर ,प्रगति पथ पर बढना है । असफलताओं से सीख लेकर,चुनौतियां स्वीकार करना है । सविता

सोचा तो है नये साल में, कुछ ऐसा कर जायें हम।मन में आये विचारों को,पूरा कर दिखलायें हम।छोड देवें आलस्य प्रमाद को,अपनायें अच्छी आदतें।खुद बदलेंगे नये साल में, दिल में सहेजें जज्बातें।पिछली गलतियों को नदोहराकर ,प्रगति पथ पर बढना है ।असफलताओं से सीख लेकर,चुनौतियां स्वीकार करना है ।सविता

धूप कितनी भी तेज हो समुन्दर सूखा नही पड़ सकता। उसी तरह उमीदों का सागर किसी एक हार से खाली नही हो सकता।

धूप कितनी भी तेज हो समुन्दर सूखा नही पड़ सकता। उसी तरह उमीदों का सागर किसी एक हार से खाली नही हो सकता।