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दोस्ती हमारी है सबसे न्यारी, लगती है मुझे ये जान से भी प्यारी। सलामत रहे ये दोस्ती हमारी, हममें हो एकता यही है दुआ हमारी। दोस्ती हमारी ऐसी जो सालो बाद मिल चेहरे की रंगत लौटायी। व्हाट्सप्प ने हमारी पहचान करायी और चेहरे पर मुस्कराहट है लायी। बातों के सिलसिले ने महफ़िल सजायी, माहौल में जैसे खुशबू है छायी। बचपन की भूली बिसरी यादें जो आई, आँखों ने खाबों की दुनिया ऐसी पाई। अपनेपन की भावना इसने फिर जगाई, थोड़ी खूबसूरती मोबाइल ने बढ़ाई। दोस्ती हमारी है जान से भी प्यारी, भूली बिसरी यादों को ताजा करायी। सविता बर्णवाल

दोस्ती हमारी है सबसे न्यारी, लगती है मुझे ये जान से भी प्यारी।सलामत रहे ये दोस्ती हमारी, हममें हो एकता यही है दुआ हमारी।दोस्ती हमारी ऐसी जो सालो बाद मिल चेहरे की रंगत लौटायी।व्हाट्सप्प ने हमारी पहचान करायी और चेहरे पर मुस्कराहट है लायी।बातों के सिलसिले ने महफ़िल सजायी, माहौल में जैसे खुशबू है छायी।बचपन
जब अपराधी या बलात्कारी, जाति का सिरमौर बनें। पुलिस-केंद्र व न्यायालय, बदनीयतों की ठौर बनें। जब अखबार छपने से, पहले ही बिक जाते हों। पत्रकार मनपसंद दरबारों में, सिर झुकाते हों। तो समझो देश की, खुशहाली जाने वाली हैं। फिर से आम लोगों के लिए 'पुष्पक', काली रात आने वाली है।

जब अपराधी या बलात्कारी, जाति का सिरमौर बनें। पुलिस-केंद्र व न्यायालय, बदनीयतों की ठौर बनें। जब अखबार छपने से, पहले ही बिक जाते हों। पत्रकार मनपसंद दरबारों में, सिर झुकाते हों। तो समझो देश की, खुशहाली जाने वाली हैं। फिर से आम लोगों के लिए ‘पुष्पक’, काली रात आने वाली है।

जब अपराधी या बलात्कारी, जाति का सिरमौर बनें।पुलिस-केंद्र व न्यायालय, बदनीयतों की ठौर बनें।जब अखबार छपने से, पहले ही बिक जाते हों।पत्रकार मनपसंद दरबारों में, सिर झुकाते हों।तो समझो देश की, खुशहाली जाने वाली हैं।फिर से आम लोगों के लिए 'पुष्पक', काली रात आने वाली है।