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जब अपराधी या बलात्कारी, जाति का सिरमौर बनें। पुलिस-केंद्र व न्यायालय, बदनीयतों की ठौर बनें। जब अखबार छपने से, पहले ही बिक जाते हों। पत्रकार मनपसंद दरबारों में, सिर झुकाते हों। तो समझो देश की, खुशहाली जाने वाली हैं। फिर से आम लोगों के लिए 'पुष्पक', काली रात आने वाली है।

जब अपराधी या बलात्कारी, जाति का सिरमौर बनें। पुलिस-केंद्र व न्यायालय, बदनीयतों की ठौर बनें। जब अखबार छपने से, पहले ही बिक जाते हों। पत्रकार मनपसंद दरबारों में, सिर झुकाते हों। तो समझो देश की, खुशहाली जाने वाली हैं। फिर से आम लोगों के लिए ‘पुष्पक’, काली रात आने वाली है।

जब अपराधी या बलात्कारी, जाति का सिरमौर बनें।पुलिस-केंद्र व न्यायालय, बदनीयतों की ठौर बनें।जब अखबार छपने से, पहले ही बिक जाते हों।पत्रकार मनपसंद दरबारों में, सिर झुकाते हों।तो समझो देश की, खुशहाली जाने वाली हैं।फिर से आम लोगों के लिए 'पुष्पक', काली रात आने वाली है।

छोड़ो न जाति-पांति, चलो बिहारी बन जाते हैं। मज़्हब के सारे भेद भुला कर, एक बंधन में बंध जाते हैं। छोड़ो न बिहारी-मराठी, चलो चलो भारतीय बन जाते हैं। एक भारत श्रेष्ठ भारत का नारा दे, कुछ कर जाते हैं। बन गए हम सब भारतीय, तो भारत फिर से विश्वगुरु बनेगा। भावी विश्व के लिए ‘पुष्पक’, इंसानियत का नया रंग गढ़ेगा॥

छोड़ो न जाति-पांति, चलो बिहारी बन जाते हैं।मज़्हब के सारे भेद भुला कर, एक बंधन में बंध जाते हैं।छोड़ो न बिहारी-मराठी, चलो चलो भारतीय बन जाते हैं।एक भारत श्रेष्ठ भारत का नारा दे, कुछ कर जाते हैं।बन गए हम सब भारतीय, तो भारत फिर से विश्वगुरु बनेगा।भावी विश्व के लिए 'पुष्पक', इंसानियत का नया रंग

नया दौर आ गया है, बदनाम होकर नाम बनता है। सच्चाई – ईमानदारी से नही, मक्कारी से काम बनता है। सनसनी फैला कर लोग ‘पुष्पक’, रातों-रात ‘स्टार’ बन जाते हैं। पर सौ साल में भी कोई, विरले ‘कलाम’ बनता हैं॥ पुष्पक दिल से…

नया दौर आ गया है, बदनाम होकर नाम बनता है।सच्चाई - ईमानदारी से नही, मक्कारी से काम बनता है।सनसनी फैला कर लोग 'पुष्पक', रातों-रात 'स्टार' बन जाते हैं।पर सौ साल में भी कोई, विरले 'कलाम' बनता हैं॥पुष्पक दिल से...
याद का दीपक जलता है जब आसानी से जो मिलता है, तो कौन उसे पूछता है। न मिले तो खोजता है। बचपन के दिन थे, बातें सुहानी थी। मेरे बाबा मेरे साथ थे, पर मुझमे वो बात न थी। जो उनने दिखाना चाहा, मैं देख न पायी। बालमन का चंचल पंछी, खेलने को दौड़ पड़ी। यादों का दीपक अक्सर, मेरे मन में जलता है, जो आसानी से मिल जाये उसे कोण पूछता है। काश वो दिन आ जाये, जो बाबा मेरे पास हो, अज्ञान का तिमिर हटाने को, चेतना का प्रकाश हो। अतीत की सुनी राहों में मन सुकून को ललचता है। बाबा की बातें याद कर, यादों का दीपक जलता है। सविता की कलम से

याद का दीपक जलता है जब आसानी से जो मिलता है, तो कौन उसे पूछता है। न मिले तो खोजता है। बचपन के दिन थे, बातें सुहानी थी। मेरे बाबा मेरे साथ थे, पर मुझमे वो बात न थी। जो उनने दिखाना चाहा, मैं देख न पायी। बालमन का चंचल पंछी, खेलने को दौड़ पड़ी। यादों का दीपक अक्सर, मेरे मन में जलता है, जो आसानी से मिल जाये उसे कोण पूछता है। काश वो दिन आ जाये, जो बाबा मेरे पास हो, अज्ञान का तिमिर हटाने को, चेतना का प्रकाश हो। अतीत की सुनी राहों में मन सुकून को ललचता है। बाबा की बातें याद कर, यादों का दीपक जलता है। सविता की कलम से

याद का दीपक जलता हैजब आसानी से जो मिलता है, तो कौन उसे पूछता है।न मिले तो खोजता है।बचपन के दिन थे, बातें सुहानी थी।मेरे बाबा मेरे साथ थे, पर मुझमे वो बात न थी।जो उनने दिखाना चाहा, मैं देख न पायी।बालमन का चंचल पंछी, खेलने को दौड़ पड़ी।यादों का दीपक अक्सर, मेरे मन में

जिंदगी में अगर जिंदगी में अगर साथ तुम्हारा हो खूबसूरत हो सफर, मंजिल हमारा हो प्राण मेरे तुझमे बसे, कोई और न गवारा हो दे दो थोड़ा दर्शन बाबा, भाग्य हमारा हो चाहे सुख हो चाहे दुःख, मेरे लब पर नाम तुम्हारा हो जिंदगी में अगर साथ तुम्हारा हो सूंदर हो जाये सफर, जब तेरा सहारा हो देना हौसला इतना, लो हैरान हो मेरी ईमान कभी न बुझे, इतनी चिंगारियाँ हो जिंदगी में अगर साथ तुम्हारा हो सविता

जिंदगी में अगरजिंदगी में अगर साथ तुम्हारा होखूबसूरत हो सफर, मंजिल हमारा होप्राण मेरे तुझमे बसे, कोई और न गवारा होदे दो थोड़ा दर्शन बाबा, भाग्य हमारा होचाहे सुख हो चाहे दुःख, मेरे लब पर नाम तुम्हारा होजिंदगी में अगर साथ तुम्हारा होसूंदर हो जाये सफर, जब तेरा सहारा होदेना हौसला इतना, लो हैरान होमेरी
वो लौह पुरुष हे लौह पुरुष हे युग के पुरुष, तू भारत माँ की शान । ऐसे वीर महापुरुष को, मेरा बारम्बार प्रणाम । भारत की एकता अखंडता को, तूने ही सुनिश्चित करवाया । आजादी का फौलादी इरादा, अपने मन में था भरमाया । राष्ट्रीय एकता स्वप्नद्रष्टा, सामंतशाही के उन्मूलनकारी । बारडोली के सत्याग्रह के जननायक, थे एक कठोर क्रन्तिकारी । सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन था, अद्भुद उपलब्धियों से भरा हुआ । भारत निर्माण में उनका योगदान भी अद्वितीय रहा । सविता की कलम से

वो लौह पुरुष हे लौह पुरुष हे युग के पुरुष, तू भारत माँ की शान । ऐसे वीर महापुरुष को, मेरा बारम्बार प्रणाम । भारत की एकता अखंडता को, तूने ही सुनिश्चित करवाया । आजादी का फौलादी इरादा, अपने मन में था भरमाया । राष्ट्रीय एकता स्वप्नद्रष्टा, सामंतशाही के उन्मूलनकारी । बारडोली के सत्याग्रह के जननायक, थे एक कठोर क्रन्तिकारी । सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन था, अद्भुद उपलब्धियों से भरा हुआ । भारत निर्माण में उनका योगदान भी अद्वितीय रहा । सविता की कलम से – Savita Barnwal

वो लौह पुरुषहे लौह पुरुष हे युग के पुरुष, तू भारत माँ की शान ।ऐसे वीर महापुरुष को, मेरा बारम्बार प्रणाम ।भारत की एकता अखंडता को, तूने ही सुनिश्चित करवाया ।आजादी का फौलादी इरादा, अपने मन में था भरमाया ।राष्ट्रीय एकता स्वप्नद्रष्टा, सामंतशाही के उन्मूलनकारी ।बारडोली के सत्याग्रह के जननायक, थे एक कठोर क्रन्तिकारी ।सरदार