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क्यों सोचते हो इतना, कि मैं तुमसे दूर हूँ। हालात ही ऐसे हैं, कि मैं मज़बूर हूँ। दूर रहकर भी ‘पुष्पक’, मैं तेरे दिल के करीब हूँ। क्योंकि तुम मेरे साया हो, और मैं तुम्हारा वजूद हूँ।

क्यों सोचते हो इतना, कि मैं तुमसे दूर हूँ।हालात ही ऐसे हैं, कि मैं मज़बूर हूँ।दूर रहकर भी 'पुष्पक', मैं तेरे दिल के करीब हूँ।क्योंकि तुम मेरे साया हो, और मैं तुम्हारा वजूद हूँ।क्यों सोचते हो इतना, कि मैं तुमसे दूर हूँ।हालात ही ऐसे हैं, कि मैं मज़बूर हूँ।दूर रहकर भी 'पुष्पक', मैं तेरे दिल

जिंदगी तुझको भी आजमा के देख लिया। तू भी बेवफा निकली किसी बेवफा की तरह। ‘पुष्पक’ ने बेइंतहा टूट कर, चाहा था तुम्हें। पर तू भी मुक़मल हुई, सिर्फ एक सज़ा की तरह॥

जिंदगी तुझको भी आजमा के देख लिया।तू भी बेवफा निकली किसी बेवफा की तरह।'पुष्पक' ने बेइंतहा टूट कर, चाहा था तुम्हें।पर तू भी मुक़मल हुई, सिर्फ एक सज़ा की तरह॥

नया दौर आ गया है, बदनाम होकर नाम बनता है। सच्चाई – ईमानदारी से नही, मक्कारी से काम बनता है। सनसनी फैला कर लोग ‘पुष्पक’, रातों-रात ‘स्टार’ बन जाते हैं। पर सौ साल में भी कोई, विरले ‘कलाम’ बनता हैं॥ पुष्पक दिल से…

नया दौर आ गया है, बदनाम होकर नाम बनता है।सच्चाई - ईमानदारी से नही, मक्कारी से काम बनता है।सनसनी फैला कर लोग 'पुष्पक', रातों-रात 'स्टार' बन जाते हैं।पर सौ साल में भी कोई, विरले 'कलाम' बनता हैं॥पुष्पक दिल से...
याद का दीपक जलता है जब आसानी से जो मिलता है, तो कौन उसे पूछता है। न मिले तो खोजता है। बचपन के दिन थे, बातें सुहानी थी। मेरे बाबा मेरे साथ थे, पर मुझमे वो बात न थी। जो उनने दिखाना चाहा, मैं देख न पायी। बालमन का चंचल पंछी, खेलने को दौड़ पड़ी। यादों का दीपक अक्सर, मेरे मन में जलता है, जो आसानी से मिल जाये उसे कोण पूछता है। काश वो दिन आ जाये, जो बाबा मेरे पास हो, अज्ञान का तिमिर हटाने को, चेतना का प्रकाश हो। अतीत की सुनी राहों में मन सुकून को ललचता है। बाबा की बातें याद कर, यादों का दीपक जलता है। सविता की कलम से

याद का दीपक जलता है जब आसानी से जो मिलता है, तो कौन उसे पूछता है। न मिले तो खोजता है। बचपन के दिन थे, बातें सुहानी थी। मेरे बाबा मेरे साथ थे, पर मुझमे वो बात न थी। जो उनने दिखाना चाहा, मैं देख न पायी। बालमन का चंचल पंछी, खेलने को दौड़ पड़ी। यादों का दीपक अक्सर, मेरे मन में जलता है, जो आसानी से मिल जाये उसे कोण पूछता है। काश वो दिन आ जाये, जो बाबा मेरे पास हो, अज्ञान का तिमिर हटाने को, चेतना का प्रकाश हो। अतीत की सुनी राहों में मन सुकून को ललचता है। बाबा की बातें याद कर, यादों का दीपक जलता है। सविता की कलम से

याद का दीपक जलता हैजब आसानी से जो मिलता है, तो कौन उसे पूछता है।न मिले तो खोजता है।बचपन के दिन थे, बातें सुहानी थी।मेरे बाबा मेरे साथ थे, पर मुझमे वो बात न थी।जो उनने दिखाना चाहा, मैं देख न पायी।बालमन का चंचल पंछी, खेलने को दौड़ पड़ी।यादों का दीपक अक्सर, मेरे मन में

जिंदगी में अगर जिंदगी में अगर साथ तुम्हारा हो खूबसूरत हो सफर, मंजिल हमारा हो प्राण मेरे तुझमे बसे, कोई और न गवारा हो दे दो थोड़ा दर्शन बाबा, भाग्य हमारा हो चाहे सुख हो चाहे दुःख, मेरे लब पर नाम तुम्हारा हो जिंदगी में अगर साथ तुम्हारा हो सूंदर हो जाये सफर, जब तेरा सहारा हो देना हौसला इतना, लो हैरान हो मेरी ईमान कभी न बुझे, इतनी चिंगारियाँ हो जिंदगी में अगर साथ तुम्हारा हो सविता

जिंदगी में अगरजिंदगी में अगर साथ तुम्हारा होखूबसूरत हो सफर, मंजिल हमारा होप्राण मेरे तुझमे बसे, कोई और न गवारा होदे दो थोड़ा दर्शन बाबा, भाग्य हमारा होचाहे सुख हो चाहे दुःख, मेरे लब पर नाम तुम्हारा होजिंदगी में अगर साथ तुम्हारा होसूंदर हो जाये सफर, जब तेरा सहारा होदेना हौसला इतना, लो हैरान होमेरी