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हे मातृभूमि हे भारत मां, तुमको ही सब समर्पण है। है चरण वंदना तेरी मां, तू ही तो जीवन दर्पण है। तेरी मिट्टी-पानी में, हम फलते है फूलते हैं। तुममे उगते हैं, तुममे ही बुझते हैं। तन मन धन समग्र मेरा, तुमको ही अर्पण है। हे मातृभूमि ! हे भारत मां, तुमको ही सब समर्पण है। पुष्पक दिल से...

हे मातृभूमि हे भारत मां, तुमको ही सब समर्पण है। है चरण वंदना तेरी मां, तू ही तो जीवन दर्पण है। तेरी मिट्टी-पानी में, हम फलते है फूलते हैं। तुममे उगते हैं, तुममे ही बुझते हैं। तन मन धन समग्र मेरा, तुमको ही अर्पण है। हे मातृभूमि ! हे भारत मां, तुमको ही सब समर्पण है। पुष्पक दिल से…

हे मातृभूमि हे भारत मां, तुमको ही सब समर्पण है।है चरण वंदना तेरी मां, तू ही तो जीवन दर्पण है।तेरी मिट्टी-पानी में, हम फलते है फूलते हैं।तुममे उगते हैं, तुममे ही बुझते हैं।तन मन धन समग्र मेरा, तुमको ही अर्पण है।हे मातृभूमि ! हे भारत मां, तुमको ही सब समर्पण है।पुष्पक दिल से...
गर्दिशों का दौर है ये, यु ना खुद को शर्मिंदा कर आना है 'नया' लौटकर, उम्मीद अपनी ज़िंदा कर अच्छे बुरे सब दिन ढले हैं, ये भी तो ढल जायेंगे हौसले का ये खेल हैं 'पुष्पक', खुद को तू परिंदा कर पुष्पक दिल से...

गर्दिशों का दौर है ये, यु ना खुद को शर्मिंदा कर आना है ‘नया’ लौटकर, उम्मीद अपनी ज़िंदा कर अच्छे बुरे सब दिन ढले हैं, ये भी तो ढल जायेंगे हौसले का ये खेल हैं ‘पुष्पक’, खुद को तू परिंदा कर पुष्पक दिल से…

गर्दिशों का दौर है ये, यु ना खुद को शर्मिंदा करआना है 'नया' लौटकर, उम्मीद अपनी ज़िंदा करअच्छे बुरे सब दिन ढले हैं, ये भी तो ढल जायेंगेहौसले का ये खेल हैं 'पुष्पक', खुद को तू परिंदा करपुष्पक दिल से...

नया दौर आ गया है, बदनाम होकर नाम बनता है। सच्चाई – ईमानदारी से नही, मक्कारी से काम बनता है। सनसनी फैला कर लोग ‘पुष्पक’, रातों-रात ‘स्टार’ बन जाते हैं। पर सौ साल में भी कोई, विरले ‘कलाम’ बनता हैं॥ पुष्पक दिल से…

नया दौर आ गया है, बदनाम होकर नाम बनता है।सच्चाई - ईमानदारी से नही, मक्कारी से काम बनता है।सनसनी फैला कर लोग 'पुष्पक', रातों-रात 'स्टार' बन जाते हैं।पर सौ साल में भी कोई, विरले 'कलाम' बनता हैं॥पुष्पक दिल से...