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याद का दीपक जलता है जब आसानी से जो मिलता है, तो कौन उसे पूछता है। न मिले तो खोजता है। बचपन के दिन थे, बातें सुहानी थी। मेरे बाबा मेरे साथ थे, पर मुझमे वो बात न थी। जो उनने दिखाना चाहा, मैं देख न पायी। बालमन का चंचल पंछी, खेलने को दौड़ पड़ी। यादों का दीपक अक्सर, मेरे मन में जलता है, जो आसानी से मिल जाये उसे कोण पूछता है। काश वो दिन आ जाये, जो बाबा मेरे पास हो, अज्ञान का तिमिर हटाने को, चेतना का प्रकाश हो। अतीत की सुनी राहों में मन सुकून को ललचता है। बाबा की बातें याद कर, यादों का दीपक जलता है। सविता की कलम से

याद का दीपक जलता है जब आसानी से जो मिलता है, तो कौन उसे पूछता है। न मिले तो खोजता है। बचपन के दिन थे, बातें सुहानी थी। मेरे बाबा मेरे साथ थे, पर मुझमे वो बात न थी। जो उनने दिखाना चाहा, मैं देख न पायी। बालमन का चंचल पंछी, खेलने को दौड़ पड़ी। यादों का दीपक अक्सर, मेरे मन में जलता है, जो आसानी से मिल जाये उसे कोण पूछता है। काश वो दिन आ जाये, जो बाबा मेरे पास हो, अज्ञान का तिमिर हटाने को, चेतना का प्रकाश हो। अतीत की सुनी राहों में मन सुकून को ललचता है। बाबा की बातें याद कर, यादों का दीपक जलता है। सविता की कलम से

याद का दीपक जलता हैजब आसानी से जो मिलता है, तो कौन उसे पूछता है।न मिले तो खोजता है।बचपन के दिन थे, बातें सुहानी थी।मेरे बाबा मेरे साथ थे, पर मुझमे वो बात न थी।जो उनने दिखाना चाहा, मैं देख न पायी।बालमन का चंचल पंछी, खेलने को दौड़ पड़ी।यादों का दीपक अक्सर, मेरे मन में
धर्म मेरा राष्ट्र है, ईमान मेरा राष्ट्र है । हिन्दू मुस्लिम नहीं हु मैं पहचान मेरी राष्ट्र है । हो मुबारक तुमको 'पुष्पक', ये जाती धर्म की लड़ाइयाँ । मेरे लिए तो बस, हर अंजाम मेरा राष्ट्र है ॥

धर्म मेरा राष्ट्र है, ईमान मेरा राष्ट्र है । हिन्दू मुस्लिम नहीं हु मैं पहचान मेरी राष्ट्र है । हो मुबारक तुमको ‘पुष्पक’, ये जाती धर्म की लड़ाइयाँ । मेरे लिए तो बस, हर अंजाम मेरा राष्ट्र है ॥

धर्म मेरा राष्ट्र है, ईमान मेरा राष्ट्र है ।हिन्दू मुस्लिम नहीं हु मैं पहचान मेरी राष्ट्र है ।हो मुबारक तुमको 'पुष्पक', ये जाती धर्म की लड़ाइयाँ ।मेरे लिए तो बस, हर अंजाम मेरा राष्ट्र है ॥
वो लौह पुरुष हे लौह पुरुष हे युग के पुरुष, तू भारत माँ की शान । ऐसे वीर महापुरुष को, मेरा बारम्बार प्रणाम । भारत की एकता अखंडता को, तूने ही सुनिश्चित करवाया । आजादी का फौलादी इरादा, अपने मन में था भरमाया । राष्ट्रीय एकता स्वप्नद्रष्टा, सामंतशाही के उन्मूलनकारी । बारडोली के सत्याग्रह के जननायक, थे एक कठोर क्रन्तिकारी । सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन था, अद्भुद उपलब्धियों से भरा हुआ । भारत निर्माण में उनका योगदान भी अद्वितीय रहा । सविता की कलम से

वो लौह पुरुष हे लौह पुरुष हे युग के पुरुष, तू भारत माँ की शान । ऐसे वीर महापुरुष को, मेरा बारम्बार प्रणाम । भारत की एकता अखंडता को, तूने ही सुनिश्चित करवाया । आजादी का फौलादी इरादा, अपने मन में था भरमाया । राष्ट्रीय एकता स्वप्नद्रष्टा, सामंतशाही के उन्मूलनकारी । बारडोली के सत्याग्रह के जननायक, थे एक कठोर क्रन्तिकारी । सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन था, अद्भुद उपलब्धियों से भरा हुआ । भारत निर्माण में उनका योगदान भी अद्वितीय रहा । सविता की कलम से – Savita Barnwal

वो लौह पुरुषहे लौह पुरुष हे युग के पुरुष, तू भारत माँ की शान ।ऐसे वीर महापुरुष को, मेरा बारम्बार प्रणाम ।भारत की एकता अखंडता को, तूने ही सुनिश्चित करवाया ।आजादी का फौलादी इरादा, अपने मन में था भरमाया ।राष्ट्रीय एकता स्वप्नद्रष्टा, सामंतशाही के उन्मूलनकारी ।बारडोली के सत्याग्रह के जननायक, थे एक कठोर क्रन्तिकारी ।सरदार