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लड़कियाँ अपनी माँ की आन बान शान होती है लड़कियाँ। अपने पिता का अभिमान व भाई का गुमान होती है लड़कियाँ। घर की रौनक, त्याग व शक्ति की पैगाम होती हैं लड़कियाँ। नन्हीं सी कली, खूबसूरत संसार होती हैं लड़कियाँ। प्यार से देखो तो श्रृंगार, गलत नज़र से देखो तो अंगार भी होती हैं लड़कियाँ। सरलता की मूरतव जटिलता की किरदार होती हैं लड़कियाँ। ईश्वर की अनुपम वरदान व सृष्टि की पालनहार होती हैं लड़कियाँ। -Savita Barnwal

लड़कियाँ अपनी माँ की आन बान शान होती है लड़कियाँ। अपने पिता का अभिमान व भाई का गुमान होती है लड़कियाँ। घर की रौनक, त्याग व शक्ति की पैगाम होती हैं लड़कियाँ। नन्हीं सी कली, खूबसूरत संसार होती हैं लड़कियाँ। प्यार से देखो तो श्रृंगार, गलत नज़र से देखो तो अंगार भी होती हैं लड़कियाँ। सरलता की मूरतव जटिलता की किरदार होती हैं लड़कियाँ। ईश्वर की अनुपम वरदान व सृष्टि की पालनहार होती हैं लड़कियाँ। -Savita Barnwal

लड़कियाँअपनी माँ की आन बान शान होती है लड़कियाँ।अपने पिता का अभिमान व भाई का गुमान होती है लड़कियाँ।घर की रौनक, त्याग व शक्ति की पैगाम होती हैं लड़कियाँ।नन्हीं सी कली, खूबसूरत संसार होती हैं लड़कियाँ।प्यार से देखो तो श्रृंगार, गलत नज़र से देखो तो अंगार भी होती हैं लड़कियाँ।सरलता की मूरतव जटिलता की किरदार
जब अपराधी या बलात्कारी, जाति का सिरमौर बनें। पुलिस-केंद्र व न्यायालय, बदनीयतों की ठौर बनें। जब अखबार छपने से, पहले ही बिक जाते हों। पत्रकार मनपसंद दरबारों में, सिर झुकाते हों। तो समझो देश की, खुशहाली जाने वाली हैं। फिर से आम लोगों के लिए 'पुष्पक', काली रात आने वाली है।

जब अपराधी या बलात्कारी, जाति का सिरमौर बनें। पुलिस-केंद्र व न्यायालय, बदनीयतों की ठौर बनें। जब अखबार छपने से, पहले ही बिक जाते हों। पत्रकार मनपसंद दरबारों में, सिर झुकाते हों। तो समझो देश की, खुशहाली जाने वाली हैं। फिर से आम लोगों के लिए ‘पुष्पक’, काली रात आने वाली है।

जब अपराधी या बलात्कारी, जाति का सिरमौर बनें।पुलिस-केंद्र व न्यायालय, बदनीयतों की ठौर बनें।जब अखबार छपने से, पहले ही बिक जाते हों।पत्रकार मनपसंद दरबारों में, सिर झुकाते हों।तो समझो देश की, खुशहाली जाने वाली हैं।फिर से आम लोगों के लिए 'पुष्पक', काली रात आने वाली है।

जिंदगी तुझको भी आजमा के देख लिया। तू भी बेवफा निकली किसी बेवफा की तरह। ‘पुष्पक’ ने बेइंतहा टूट कर, चाहा था तुम्हें। पर तू भी मुक़मल हुई, सिर्फ एक सज़ा की तरह॥

जिंदगी तुझको भी आजमा के देख लिया।तू भी बेवफा निकली किसी बेवफा की तरह।'पुष्पक' ने बेइंतहा टूट कर, चाहा था तुम्हें।पर तू भी मुक़मल हुई, सिर्फ एक सज़ा की तरह॥
गर्दिशों का दौर है ये, यु ना खुद को शर्मिंदा कर आना है 'नया' लौटकर, उम्मीद अपनी ज़िंदा कर अच्छे बुरे सब दिन ढले हैं, ये भी तो ढल जायेंगे हौसले का ये खेल हैं 'पुष्पक', खुद को तू परिंदा कर पुष्पक दिल से...

गर्दिशों का दौर है ये, यु ना खुद को शर्मिंदा कर आना है ‘नया’ लौटकर, उम्मीद अपनी ज़िंदा कर अच्छे बुरे सब दिन ढले हैं, ये भी तो ढल जायेंगे हौसले का ये खेल हैं ‘पुष्पक’, खुद को तू परिंदा कर पुष्पक दिल से…

गर्दिशों का दौर है ये, यु ना खुद को शर्मिंदा करआना है 'नया' लौटकर, उम्मीद अपनी ज़िंदा करअच्छे बुरे सब दिन ढले हैं, ये भी तो ढल जायेंगेहौसले का ये खेल हैं 'पुष्पक', खुद को तू परिंदा करपुष्पक दिल से...

नया दौर आ गया है, बदनाम होकर नाम बनता है। सच्चाई – ईमानदारी से नही, मक्कारी से काम बनता है। सनसनी फैला कर लोग ‘पुष्पक’, रातों-रात ‘स्टार’ बन जाते हैं। पर सौ साल में भी कोई, विरले ‘कलाम’ बनता हैं॥ पुष्पक दिल से…

नया दौर आ गया है, बदनाम होकर नाम बनता है।सच्चाई - ईमानदारी से नही, मक्कारी से काम बनता है।सनसनी फैला कर लोग 'पुष्पक', रातों-रात 'स्टार' बन जाते हैं।पर सौ साल में भी कोई, विरले 'कलाम' बनता हैं॥पुष्पक दिल से...